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May 16, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
कि न्ही शब्दों के अन्य भाषाओं में पर्याय तलाशने का काम तो रोज़मर्रा में हम करते ही हैं क्योंकि आज के महानगरीय जीवन में हमारे इर्दगिर्द बहुभाषी परिवेश है । मगर व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के अन्य भाषाओं में प्रतिरूप तलाशने की दिलचस्प मग़ज़मारी ...
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May 11, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
फ़ा रसी के रास्ते हिन्दी में दाखिल हुए शब्दों में हुस्न का शुमार भी ऐसे शब्दों में होता है जिसका प्रयोग सुंदरता, रमणीक, खूबसूरत अथवा दर्शनीय जैसे भावों को व्यक्त करने में होता है । शेरो-शायरी की वजह से भी यह शब्द हिन्दी वालों की ज़बान प ...
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May 7, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
र क्त वाहिनी के लिए हिन्दी में रग शब्द भी खूब प्रचलित है, अलबत्ता नस का चलन ज्यादा है । नस को नाड़ी भी कहते हैं और नलिका भी । रग भारत-ईरानी परिवार का शब्द है और फ़ारसी के ज़रिए हिन्दी में आया है जिसका सही रूप रग़ है । रग़ की व्युत्पत्ति ...
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Apr 27, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
दु निया में शायद ही कोई होगा जिसे खुशबू नापसन्द होगी । सुवास से न सिर्फ़ तन-मन बल्कि आसपास का माहौल भी महक उठता है । सुगन्धित पदार्थ की एक लम्बी फ़ेहरिस्त है और इसमें लोबान का नाम भी शामिल है । अगरबत्ती, धूप और हवन सामग्री के निर्माण मे ...
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Apr 25, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
कि सी हलकी धातु पर कीमती धातु की परत चढ़ाने की परम्परा दुनियाभर में प्राचीनकाल से प्रचलित है जिसे मुलम्मा कहा जाता है । मुलम्मा शब्द भारत की क़रीब क़रीब सभी प्रमुख भाषाओं में प्रचलित है । हिन्दी की तो ख़ैर सभी बोलियों में इसे खूब लिखा-प ...
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Apr 25, 2012
| Author: Udan Tashtari
| Source: उड़न तश्तरी ....
एक सप्ताह गुजर चुका है सेन फ्रेन्सिसको आये. एक सप्ताह होटल में और रहना है फिर एक किराये का अपार्टमेन्ट ले लिया है, उसमें शिफ्ट हो जायेंगे. नजदीक ही है. ३० मिनट लगेंगे दफ्तर पहुँचने में. यूँ कर शायद ६ माह गुजारना हो यहाँ कि कौन जाने- शाय ...
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Apr 14, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
शब्द-संदर्भःनीलाम, विपणन, पण्य, क्रय-विक्रय, गल्ला, हाट, दुकान, पट्टण, पोर्ट, पंसारी
जी विकोपार्जन और ज्ञानार्जन के निमित्त ही मनुष्य निरन्तर भटकता रहा है जिसके चलते कई तरह के काम और कार्यक्षेत्र विकसित होते चले गए । इन गतिविधियों से भ ...
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Apr 11, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बंन्धित आलेख-1.आखिरी मक़ाम की तलाश... पिया मिलन को जाना.…2. प्यारा कौन ? बैल , बालम या मलाई ?.3.लीला, लयकारी और प्रलय….
बो लचाल की भाषा को लय और अर्थवत्ता देने में मुहावरों का अहम क़िरदार होता है । एक मुहावरा पाँच वाक्यों के बराबर ब ...
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Apr 8, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
पिछली कड़ियाँ-1.बक्सा, बकसिया और बॉक्सिंग.2कनस्तर और पीपे में समाती थी गृहस्थी.3
बक्से की तरह ही ट्रंक trunk भी कई दशकों से भारतीय गृहस्थी की एक ज़रूरी व्यवस्था बना हुआ है । चीज़ों को उनके लक्षणों के आधार पर ही नाम मिलता है । शरीर को त ...
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Apr 7, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सामान रखने की व्यवस्थाओं, उपकरणों के लिए हिन्दी में कई शब्द प्रचलित हैं जिनमें बक्सा, डिब्बा, संदूक, ट्रंक, पेटी, कनस्तर ऐसे नाम हैं जो हिन्दी में सदियों से प्रचलित हैं । ध्यान रहे कि इन सभी में किसी भी तरह का सामान भरा जा सकता है । अटै ...
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Apr 6, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
अ गर पूछा जाए कि फ़िरंगी ज़बान के वे कौन से शब्द हैं जिनका इस्तेमाल भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य में खूब हुआ है । फिरंगी शब्द का मतलब यूँ तो विदेशी होता है मगर हिन्दी में फ़िरंगी से अभिप्राय अंग्रेजों से है इसलिए फ़िरंगी भाषा यानी अंग्र ...
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Apr 4, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
लायक में ना उपसर्ग लगने से नालायक शब्द बनता है और किसी को मूर्ख, अयोग्य, नाकारा, निकम्मा, नाकाबिल क़रार देते हुए अक़्सर नालायक के ख़िताब से नवाज़ा जाता है ।
बोलचाल की हिन्दी में विभिन्न स्रोतों से आकर कई शब्द अपनी ख़ास पैठ बना चुके हैं ...
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Apr 3, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.मोची, मोजा, विमोचन और जुराब.2.लिफाफेबाजी और उधार की रिकवरी 3.चांदी का जूता, चंदन की चप्पल 4.जैकब, जैकेट और याकूब.5.जल्लाद, जल्दबाजी और जिल्दसाजी.6.सिर्फ मोटी खाल नहीं काफी…7.कृषक की कशमकश और फ़ाक़ाकशी
फ़ा रसी ज़बान से ...
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Apr 3, 2012
| Author: Udan Tashtari
| Source: उड़न तश्तरी ....
फरवरी १४, तब मैने लिखा था कि शायद १७०० पन्नों की ई बुक शान्ताराम की शुरुवात ही है- वाकई ९८८ पन्नों की पुस्तक- परन्तु ईबुक में पन्ने बढ़ जाते हैं. आज १ अप्रेल- खत्म हुई पुस्तक. मानो एक युग का अन्त हुआ. यह ४५ दिन- सुबह शाम ४५-४५ मिनट इस प ...
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Apr 2, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सा हस का सबसे पसंदीदा विकल्प अगर हिन्दी में कोई दूसरा है तो वह हिम्मत है । फ़ारसी की प्रसिद्ध कहावत हिन्दी में भी सैकड़ों बरसों से जस की तस हौसलाअफ़ज़ाई के लिए कही जाती है – “हिम्मते मर्दाँ, मददे खुदा । “ जो बात तीन अक्षरों वाले साहस ...
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Apr 1, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.गुमशुदा और च्यवनप्राश.2.लोक क्या है ?
कि सी बात की जानकारी होने के सम्बन्ध में आए दिन हम ‘मालूम’ और ‘पता’ शब्द का प्रयोग करते हैं । “मालूम नहीं”, “पता नहीं” कह कर दरअसल हम आई बला को टालने में खुद को कामयाब समझते हैं, द ...
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Mar 30, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.हाथों की कुशलता यानी दक्षता.2.दक्षिणापथ की प्रदक्षिणा.3.टैक्सी की तकनीक, टैक्स की दक्षता.4.बेपेंदी का लोटा और लोटा-परेड.5. भांडाफोड़, भड़ैती और भिनभिनाना.6.बालटी किसकी ? हिन्दी या पुर्तगाली की .7.नांद, गगरी और बटलोई.8 म ...
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Mar 29, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
गर्मियों की सामान्य बीमारी हैजा है । इसे कालरा भी कहा जाता है जो बैक्टीरिया जनित रोग है ।
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Mar 28, 2012
| Author: Udan Tashtari
| Source: उड़न तश्तरी ....
हिन्दुस्तान की समस्या यह नहीं है कि हम क्या करते हैं? जो हम करते हैं वह मानव स्वभाव है, वो कोई समस्या नहीं.. सारी दुनिया वही करती है मगर समस्या यह है कि हम जो भी करते हैं अति में करते हैं. यही हमें औरों से अलग विशिष्ट पहचान देता है. विश ...
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Mar 25, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
वि भिन्न समाजों की संस्कृति, तौरतरीकों और आदतों का प्रभाव भी भाषा पर पड़ता है जिससे शब्दों की अर्थवत्ता बदलती चलती है। कई बार यह बदलाव हास्यास्पद होता है मगर भाषा तो समृद्ध होती ही है। चमक-दमक भरी ज़िंदगी अथवा बढ़िया, अच्छा, बेहतरीन, सु ...
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Mar 23, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
गु मना, खोना, लापता होना जैसी सामान्य घटनाएँ हमारे इर्द-गिर्द रोज़ होती हैं । ज़िन्दगी की जद्दोजहद में हम इस क़दर व्यस्त रहते हैं कि कई लोग हमें गुमशुदा समझने लगते हैं और कई चीज़ें हम गुमा बैठते हैं । इन्सानी फ़ितरत भी अजीब होती है । दर ...
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Mar 21, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
पिछली कड़ी-खुलासे का खुलासा
हिन्दी के सर्वाधिक प्रयुक्त शब्दों में ‘खाली’ का शुमार भी है जिसमें रिक्तता, शून्यता, रीतापन जैसे भाव हैं । जिसमें कुछ न हो, शून्य हो उस स्थान को खाली कहते हैं । ‘खाली’ शब्द की मुहावरेदार अर्थवत्ता की वजह से ...
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Mar 21, 2012
| Author: Udan Tashtari
| Source: उड़न तश्तरी ....
इधर व्यस्तता के दौर में समय समय पर आस पास देखते, अखबार पढ़ते, टीवी देखते तरह तरह के विचार आते गये और मैं उन्हें अलग अलग कागज पर लिखता रहा.
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Mar 18, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
प्या ज के छिलके की तरह ही शब्दों पर भी न जाने कितनी परतें चढ़ी रहती हैं । हर परत पर उस शब्द के चरित्र को बताने वाला एक डीएनए कोड दर्ज़ रहता है । सारी परतें उतारे बिना उस शब्द की अर्थवत्ता की थाह मिलना नामुमकिन है । इसी तरह प्रत्येक मनुष ...
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Mar 18, 2012
| Author: Satyajeetprakash
| Source: हृदयांजलि
मैं अपने ब्लॉग के लिए सुंदर हिंदी फॉट की तलाश में था। तलाश पूरी हुई। और मैंने अपने ब्लॉग की फॉंट सैटिंग भी कर ली है। इसके बाद मेरा ब्लॉग सुंदर दिखने लगा है। आप भी अपने ब्लॉग को सुंदर, आकर्षक और मनोरम बना सकते हैं। मगर, ये ब्लॉग अपने सुं ...
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Mar 17, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.वैजयन्तीमाला , झंडाबरदार और जयसियाराम !2.रुआबदार अफसर था कभी जमादार...3.सेना से फौजदारी तक…4.लाजमी है मुलाजिमों का लवाजमा 5.क्या हैं गुड़ी पड़वा और नवसंवत्सर 6.मिस्री पेपर और बाइबल 7.लंबरदार से अलमबरदार तक 8.सैनिक सन्या ...
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Mar 15, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.घर-गिरस्ती की रस्सियाँ 2.दिल चीज़ क्या है…नाचीज़ क्या है 3.ज़बान को लगाम या मुंह पर ताला!!! 3.साथियों में फ़र्क़ करना सीखो साथी! 5.कारवां में वैन और सराय की तलाश 6.टट्टी की ओट और धोखे की टट्टी 7.‘अहदी’ यानी आलसी की ओहदे ...
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Mar 13, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
सम्बन्धित आलेख-1.सरपत के बहाने शब्द संधान…2.सरपत की धार पर अभय तिवारी 3.हरियाली और घसियारा…4.कैसे कैसे वंशज! बांस, बांसुरी और बंबू 5.कानून का डंडा या डंडे का कानून 6.कनस्तर और पीपे में समाती थी गृहस्थी
बाँ स का एक नाम “बर्रू” भी है । ह ...
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Mar 13, 2012
| Author: Udan Tashtari
| Source: उड़न तश्तरी ....
कहते हैं कि दर्द अपनों संग बांट लेने से कम हो जाता है, सो बांट ले रहे हैं वरना बांटने जैसा कुछ है नहीं.
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Mar 11, 2012
| Author: अजित वडनेरकर
| Source: शब्दों का सफर
श ब्दों की जन्मगाथा भी अनोखी होती है और अक्सर इतने विचित्र तथ्य सामने आते हैं कि भरोसा करना मुश्किल होता है । अब कोयला और कोयल को ही लीजिए । एक सी ध्वनियाँ होते हुए भी दोनों की तुलना करने की बात मन में नहीं आती । काले रंग की समानता को अ ...
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